Swami Vivekananda Biography Hindi 2023- Best Story

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Swami Vivekananda Biography Hindi 2023

Swami Vivekananda Biography Hindi 2023: स्वामी विवेकानंद का नाम आते ही एक बात जरूर दिमाग में आती है। यही वह बात है जिसे स्वामी विवेकानंद एक बार पढ़ा करते थे। वह उसे कभी नहीं भूलते थे। इस बात की चर्चा कभी न कभी सभी की पढ़ाई के दौरान होती है। तो क्या ये सच में सच है? क्या ऐसा हो सकता है कि कोई कितनी भी मोटी या बड़ी किताब पढ़ ले और उसकी एक-एक लाइन को एक साथ याद किया जा सके? ऐसा सोचना भी कठिन है।

लेकिन स्वामी विवेकानंद की जीवनी पर आर्टिकल्स को पढ़ने से इसकी वास्तविकता सामने आती है। अब मैं आपको एक घटना सुनाता हूँ। स्वामी विवेकानंद अपने शिष्यों ( Student ) के साथ मेरठ में थे। उसी समय स्वामी अखंडानंद भी वहां आ गए। पास में एक पुस्तकालय ( लाइब्रेरी ) था। स्वामी विवेकानंद ने उस पुस्तकालय से एक किताब लाने को कहा था। इसके बाद अखंडानंद ने बैंकर, दार्शनिक और राजनीतिज्ञ ‘सर जॉन लुबॉक’ की किताब ली, जिसके कई पार्ट ( भाग ) थे।

यह किताब ऐसी थी कि लोग इसे पढ़ने में आमतौर पर दो से तीन दिन या उससे ज्यादा का समय लेते थे। लेकिन स्वामी विवेकानंद ने एक दिन में उस किताब को पढ़कर पुस्तकालय ( लाइब्रेरी ) को लौटा दिया और दूसरा भाग लाने को कहा। फिर अखण्डानंद पुस्तकालय से दूसरा भाग लेकर आए। एक दिन पहले ही पढ़कर तीसरे पार्ट को लाने को कहा।

लाइब्रेरीयान को आश्चर्य हुआ जब वह इतनी जल्दी कई भागों को पढ़कर लौटा। उस लाइब्रेरियन ने दावा किया कि स्वामी विवेकानंद बिना पढ़े किताबें लौटा देते है। क्योंकि आज तक कोई भी एक भाग को इतने दिनों में पूरा नहीं कर पाया है, जितना उन्होंने कई भागों को इससे भी कम समय में पढ़ लिया है। लाइब्रेरीयान के प्रश्न सुनकर अखण्डानंद लौट आए और उन्होंने स्वामी विवेकानंद को यह जानकारी दी।

इसके बाद स्वामी विवेकानंद स्वयं पुस्तकालय पहुंचे। उन्होंने लाइब्रेरियन से कहा कि उनके द्वारा लौटाई गई किताबों से वह कहीं से भी और किसी भी पेज से कोई भी प्रश्न पूछ सकता है। इस पर लाइब्रेरियन थोड़ा हंसे। फिर उसने किताबें उठाईं और कोई भी पन्ना निकाला और सवाल पूछने लगा।

उन्होंने कुछ ही समय में दर्जनों पृष्ठों से प्रश्न पूछे और स्वामी विवेकानंद ने उन्हें एक-एक शब्द के साथ पूरी लाइन सुनाई। यह देख लाइब्रेरियन (पुस्तकालयाध्यक्ष) सन्न रह गया, और हार मान कर उसे अपनी गलती का पछतावा होने लगा। इस तरह स्वामी विवेकानंद ने अपने आध्यात्मिक ज्ञान व समझ से न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में ज्ञान और दर्शन का झंडा बुलंद किया।

शिकागो धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जब उन्हें बोलने का अवसर मिला तो उन्होंने अपने भाषण को इस तरह संबोधित किया कि सभा में उपस्थित सभी लोग उन्हें सुनने के लिए उत्सुक थे।

Swami Vivekananda Biography in Hindi 2023

पूरा नाम नरेन्द्र नाथ दत्त
घरेलु नाम/पेट नाम नरेन्द्र/नरेन
Monk बनने के बाद स्वामी विवेकानंद
माता का नाम भुवनेश्वरी देवी
पिता का नाम विश्व नाथ दत्त
भाई बहन संख्या इनके 9 भाई बहन थे
जन्म स्थान कोल्कता, पच्छिम बंगाल भारत
जन्म तिथि 12 जनवरी 1863
शिक्षा बैचलर of आर्ट (BA) 1884
गुरु का नाम राम कृष्णा परमहंस
राष्ट्रीयता भारतीय
संस्थापक रामकृष्ण मिशन एवं रामकृष्ण मठ
फिलोसोफ़ी आधुनिक वेदांत एवं राज योग
साहित्यिक कार्य राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, मेरे गुरु [मेरे गुरु] , अल्मोड़ा से कोलंबो तक द्वारा दिए गए सभी व्याख्यान [व्याख्यान]।
अन्य महत्वपूर्ण कार्य न्यू यॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना, केलिफोर्निया में ‘शांति आश्रम [Peace Retreat]’ और भारत में अल्मोड़ा के पास अद्वैत आश्रम की स्थापना.
स्वामी विवेकानंद जी के शिष्य अशोकानंद, विराजानंद, परमानंद, अलसिंगा पेरुमल, अभयानंद, सिस्टर निवेदिता, स्वामी सदानंद।
भागीदारी 1893 शिकागो (अमेरिका) में विश्वधर्म परिषद्
दिवस 12 जनवरी युवा दिवस
मृत्यु तिथि 04 जुलाई 1902
मृत्यु स्थान बेलूर, पच्छिम बंगाल, भारत
Swami Vivekananda Biography Hindi 2023

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स्वामी विवेकानंद की जीवनी (Swami Vivekananda Biography Hindi 2023), स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 फरवरी, 1863 को कलकत्ता महानगर में हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था। और Swami Vivekanand Mother’s Name ( माता का नाम ) भुवनेश्वरी देवी था। हमारे देश में समय-समय पर परिस्थितियों के अनुसार संत महापुरुषों ने जन्म लिया और अपने देश की दुखद परिस्थितियों का विनाश किया और पूरी दुनिया को एक सुखद संदेश दिया।

इससे हमारे देश की भूमि गौरवान्वित और गौरवान्वित हुई है। इसके कारण इसे पूरे विश्व में सम्मानजनक स्थान मिला। देश को प्रतिष्ठा के शिखर तक ले जाने वाले महापुरुषों में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Biography Hindi 2023) का नाम संपूर्ण मानव जाति के दूतों में से एक है।

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स्वामी विवेकानंद बचपन ( Swami Vivekanand Childhood )

स्वामी विवेकानंद जी आर्थिक रूप से संपन्न परिवार थे, एवं उनके पिता पच्छिमी संस्कृति ( मॉडर्न युग ) में विश्वास करते थे। इसलिए वे उन्हें अंग्रेजी भाषा और शिक्षा का ज्ञान दिलाना चाहते थे। उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा में कभी रुचि नहीं ली। बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के बावजूद उनका शैक्षणिक प्रदर्शन औसत था, उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रवेश स्तर पर 40 प्रतिशत अंक, एफए में 40 प्रतिशत और बीए में 56 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

माता भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक महिला थीं। वह नरेंद्र नाथ (स्वामीजी के बचपन का नाम) के बचपन के दौरान रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाया करती थीं। जिसके बाद वह अध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढ़ते गए। कहानियाँ सुनते-सुनते उनका हृदय हर्ष से भर जाता था। रामायण सुनते-सुनते बालक नरेंद्र का सरल शिशु हृदय भक्ति रस से भर जाता था। वह अक्सर अपने ही घर में ही ध्यान मग्न हो जाया करते थे, जब उनके घर वाले उनको पकड़कर जोर जोर से हिलाया करते थे तब कही जाकर उनका ध्यान कहीं टूटता था।

स्वामी विवेकानंद का सफर (Swami Vivekananda Life Journey)

अब Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 आर्टिकल में स्वामी जी के जिन्दी के सफ़र जानेगे कि उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपना घर और परिवार को छोड़कर सन्यासी बनने का निर्धारण किया। विद्यार्थी जीवन में वह ब्रह्म समाज के नेता महा ऋषि देवेंद्र नाथ ठाकुर के संपर्क में आए।

स्वामी विवेकानंद जी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए इन्होंने नरेंद्र को रामकृष्ण परमहंस के पास जाने की सलाह दी। स्वामी जी रामकृष्ण परमहंस जी दक्षिणेश्वर के काली मंदिर के पुजारी थे। परमहंस जी की कृपया से स्वामी जी आत्मज्ञान प्राप्त हुआ और वह परमहंस जी के प्रमुख शिष्य हो गए।

1885 में Swami Vivekanand Ke Guru रामकृष्ण परमहंस जी की कैंसर के कारण मृत्यु हो गई। उसके बाद स्वामी जी ने रामकृष्ण संघ की स्थापना की आगे चलकर देश का नाम रामकृष्ण मठ व रामकृष्ण मिशन हो गया।

नरेन्द्र की शिक्षा दीक्षा [Swami Vivekananda Education]

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सन 1871 में जब नरेन्द्र 8 वर्ष के थे, उनका प्रवेश ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूशन में एडमिट करा दिया गया और सन 1877 तक उन्होंने यही शिक्षा प्राप्त की. सन 1877 – 1879 तक वे सह परिवार रायपुर में रहे और सन 1879 में पुनः कलकत्ता लौट आये.

सन 1879 में नरेन्द्र ने अपनी मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया. एक साल बाद उन्होंने कलकत्ता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज में दाखिला लिया और फिलोसफी पढ़ना प्रारंभ किया. यहाँ उन्होंने पश्चिमी तर्क, पश्चिमी फिलोसफी और यूरोपियन देशों के इतिहास के बारे में ज्ञानार्जन किया.

नरेन्द्र ( Swami Vivekanand ) विभिन्न विषय पढ़ते थे, जिनमें फिलोसफी, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य, आदि शामिल थे. इसके अलावा वे हिन्दू धर्म ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों, श्रीमद् भगवद गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों में भी बड़ी रूचि रखते थे और इन्हें पढ़कर वे अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत करते थे.

सन 1884 में नरेन्द्र ने बेचलर ऑफ़ आर्ट की डिग्री प्राप्त कर ली थी. नरेन्द्र की आश्चर्यजनक याददाश्त के कारण उन्हें कुछ लोग ‘श्रुतिधरा’ भी कहते थे. नरेन्द्र की बढ़ती उम्र के साथ उनका ज्ञान तो बढ़ ही रहा था, परन्तु उनके तर्क भी प्रभावी होते जा रहे थे. उनके मन की ईश्वर के अस्तित्व की बात और भी गहराती गयी और इसी ने उन्हें “ब्रह्मसमाज” से जोड़ा, परन्तु उनकी प्रार्थनाओं के तरीकें और भजन, आदि में निहित सार भी उनकी ईश्वर के प्रति जिज्ञासा को शांत नहीं कर पाया.

स्वामी विवानंद का अपने गुरु से मिलन [Swami Vivekananda Meeting with His Teacher]

ब्रह्म समाज से जुड़ने के बाद नरेन्द्र को ब्रह्म समाज के प्रमुख देवेन्द्रनाथ टैगोर से मिलने का मौका मिला और अपनी आदत के अनुसार उनसे पूछा कि “क्या उन्होंने ईश्वर को देखा हैं?”, तब देवेन्द्रनाथजी ने उनके प्रश्न का उत्तर देने की बजाय उनसे कहा कि “बेटे, तुम्हारी नज़र एक योगी की हैं”, और इसके बाद भी उनकी ईश्वर की खोज जारी रही.

ब्रह्म समाज से जुड़ने के बाद, परन्तु अपने अध्ययन के दौरान ही सन 1881 में वे दक्षिणेश्वर के रामकृष्ण परमहंस से मिले. श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के मंदिर में पुजारी हुआ करते थे. वे बहुत बड़े विद्वान तो नहीं, परन्तु एक परम भक्त अवश्य थे. जब नरेन्द्र उनसे पहली बार मिले तो अपनी आदत और जिज्ञासा वश उन्होंने रामकृष्ण परमहंस से भी पूछा कि “क्या उन्होंने ईश्वर को देखा हैं ?” तो रामकृष्ण परमहंस ने उत्तर दिया कि “हाँ, मैंने ईश्वर को देखा हैं और बिल्कुल वैसे ही जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूँ.

” नरेन्द्र को ऐसा उत्तर देने वाले वे प्रथम व्यक्ति थे और नरेन्द्र उनकी बात की सच्चाई को महसूस भी कर पा रहे थे. उस समय वे पहली बार किसी व्यक्ति से इतना प्रभावित हुए थे. इसके पश्चात् उन्होंने रामकृष्ण परमहंस से कई मुलाकातें की और अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने में सक्षम इस व्यक्ति [रामकृष्ण परमहंस] को अपना गुरु बना लिया. इस प्रकार नरेन्द्र ने अपने गुरु की छत्र – छाया में 5 सालों तक ‘अद्वैत वेदांत’ का ज्ञान प्राप्त किया.

रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु और मठवासी बनने का निर्णय [Death of Ramkrishna Paramhans & Decision to be a Monk] -:

सन 1886 में रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु हो गयी, वे गले के कैंसर से पीड़ित थे. उन्होंने अपना उत्तराधिकारी नरेन्द्र Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 को बनाया था. अपने गुरु की मृत्यु के पश्चात् वे स्वयं और रामकृष्ण परमहंस के अन्य शिष्यों ने सब कुछ त्याग करके, मठवासी [Monk] बनने की शपथ ली और वे सभी बरंगोर [Barangore] में निवास करने लगे.

स्वामी विवेकानंद की यात्राएं [Swami Vivekananda journey to america] -:

सन 1890 में नरेन्द्र Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 ने लम्बी यात्राएँ की, उन्होंने लगभग पूरे देश में भ्रमण किया. अपनी यात्राओं के दौरान वे वाराणसी, अयोध्या, आगरा, वृन्दावन और अलवर आदि स्थानों पर गये और इसी दौरान उनका नामकरण स्वामी विवेकानंद ( Swami Vivekananda Biography Hindi ) के रूप में हुआ, उनके अच्छे और बुरे में फर्क करके अपने विचार रखने की आदत के कारण यह नाम उन्हें खेत्री के महाराज ने दिया था.

इस यात्रा के दौरान वे राजाओं के महल में भी रुकें और गरीब लोगों के झोपड़ों में भी. इससे उन्हें भारत के विभिन्न क्षेत्रों और वहाँ निवास करने वाले लोगों के संबंध में पर्याप्त जानकारी मिली. उन्हें समाज में जात – पात के नाम पर फैली तानाशाही के बारे में जानकारी मिली और इस सब से अंततः उन्हें ये समझ आया कि यदि उन्हें एक नये विकसित भारत का निर्माण करना हैं तो उन्हें इन बुराइयों को ख़त्म करना होगा.

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अपनी यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद के साथ उनका कर्मकुंडल [वाटर पॉट], उनका स्टाफ और 2 किताबें -: श्रीमद् भगवत गीता और दी इमिटेशन ऑफ़ क्रिस्ट हमेशा रहती थी. इस भ्रमण के दौरान उन्होंने भिक्षा [Alms] भी मांगी.

विश्व धर्म सम्मलेन [Conference of World Religions] -:

सन 1893 में स्वामी विवेकानंद अमेरिका के शिकागो शहर पहुंचें. यहाँ सम्पूर्ण विश्व के धर्मों का सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस सम्मलेन में एक स्थान पर सभी धर्म गुरुओं ने अपने – अपने धर्म की पुस्तकें रखी थी, वहाँ हमारे देश के धर्म के वर्णन के लिए रखी गयी एक छोटी सी किताब थी – “श्रीमद् भगवत गीता”, जिसका कुछ लोग मजाक बना रहे थे.

परन्तु जैसे ही स्वामी विवेकानंद की बारी आई और उन्होंने अपना भाषण देने की शुरुआत की, वैसे ही सारा हॉल तालियों की आवाज से गूंज उठा, क्योंकि स्वामी विवेकानंद के द्वारा अपने भाषण की शुरुआत में कहे गये वे शब्द थे -: “मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों, इसके बाद उनके द्वारा किये गये धर्म के वर्णन से सभी लोग अभिभूत हो गये और हमारी धार्मिक किताब श्रीमद् भगवत गीता का सभी ने लोहा माना.

सन 1895 तक उनके व्यस्त कार्यक्रमों और दिनचर्या का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ने लगा था और इसीलिए अब उन्होंने अपने लेक्चर टूर को विराम दिया और वेदांत और योग के संबंध में निजी कक्षाएं [प्राइवेट क्लास] देने लगे. इस वर्ष में नवम्बर माह में वे एक आयरिश महिला मार्गरेट एलिज़ाबेथ से मिले, जो आगे जाकर उनकी प्रमुख शिष्यों में से एक रही और बाद में उन्हें भगिनी निवेदिता के नाम से जाना गया.

सन 1896 में वे ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के मैक्स मुलर से मिले, जो एक इंडोलोजीस्ट थे और पश्चिम में स्वामी विवेकानंदजी के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी की जीवनी लिखने वाले प्रथम व्यक्ति थे. उनके ज्ञान और विद्वता को देखते हुए उन्हें हॉवर्ड यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अकादमिक पद का प्रस्ताव दिया गया, परन्तु अपने मठवासी जीवन के बन्धनों के कारण स्वामीजी ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया.

स्वामी विकानंद का भारत आगमन और रामकृष्ण मिशन की स्थापना [Swami Vivekananda and Ramakrishna Mission]

पश्चिमी देशों की 4 साल लम्बी भ्रमण यात्रा के बाद सन 1897 में स्वामी विवेकानंद भारत लौट आये. अपनी यूरोप यात्रा के बाद स्वामी विवेकानंद हमारे देश के दक्षिणी क्षेत्रों -: पंबन, रामेश्वरम, रामनाद, मदुरै, कुम्बकोनाम और मद्रास में भी अपने लेक्चर देने गये. वे अपने लेक्चर्स में हमेशा निम्न श्रेणी के लोगों के उत्थान की बात कहते थे.

इन सभी स्थानों पर आम जनता और राज घरानों ने इनका उत्साह पूर्वक स्वागत किया. इस दौरान वे ये अनुभव कर चुके थे कि यदि भारत में विकास की नई लहर शुरू करनी हैं तो जातिवाद को ख़त्म करना होगा, धर्म का सही अर्थ लोगों को समझाना होगा और उनका आत्मिक विकास [Spiritual Development] करना होगा और ये सब एक मिशन की स्थापना से ही संभव हैं. तब उन्होंने अपने गुरु के नाम पर ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की और इसके सिद्धांत और लक्ष्य निश्चित किये, जो कि कर्म योग पर आधारित थे.

अगले 2 साल में वे गंगा नदी के किनारे एक जमीन खरीदने और वहाँ एक भवन का निर्माण कराने में व्यस्त रहें और यहाँ ‘रामकृष्ण मठ’ की स्थापना की. रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ दोनों का ही प्रमुख केंद्र [Headquarters] बेलूर मठ हैं. इनके अलावा स्वामी जी ने अन्य 2 मठों की और स्थापना की, जिसमे से एक ‘अद्वैत आश्रम’ हैं, जो हिमालय में अल्मोड़ा के पास मायावती में स्थित हैं और दूसरा मद्रास में स्थित हैं. इसके साथ ही 2 जर्नल्स की भी शुरुआत की.

अंग्रेजी भाषा में ‘प्रबुद्ध भारत’ और बंगाली में ‘उद्बोधन’.

Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 ने शिकागो में प्रथम विज़िट की यात्रा के दौरान जमशेद टाटा को अन्वेषण और शिक्षण संस्थान [Research and Educational Institution] खोलने के लिए प्रेरित किया. इसकी स्थापना के बाद जमशेदजी टाटा ने उन्हें इस संस्थान के प्रमुख पद को ग्रहण करने का प्रस्ताव दिया, परन्तु उन दोनों के बीच ‘आध्यात्मिक विचार’ न मिलने के कारण स्वामी विवेकानंदजी ने उनके इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.

स्वामी विवेकानंद का पश्चिम का दूसरा दौरा और अंतिम वर्ष [Second Visit to the West and Final Years of Swami Vivekanand]

सन 1899 में अपने गिरते स्वास्थ्य के बाबजूद, स्वामी जी ने दूसरी बार अपने पश्चिम के दौरे का निश्चय किया और इस बार उनके साथ उनके शिष्य भगिनी निवेदिता और स्वामी तुरियानंद जी थे. इस दौरान उन्होंने सेन फ्रांसिस्कों और न्यू यॉर्क में ‘वेदांत सोसाइटी’ की स्थापना की और केलिफोर्निया में ‘शांति आश्रम [Peace Retreat]’ स्थापित किया.

सन 1900 में वे ‘धर्म सभा’ हेतु पेरिस चले गये. यहाँ उनका लेक्चर ‘लिंगम की पूजा’ और ‘श्रीमद् भगवद की सत्यता’ पर आधारित था. इस सभा के बाद भी वे अनेक स्थानों पर गये और अंत में 9 दिसंबर 1900 को कलकत्ता वापस लौट आए और फिर बेलूर में स्थित बेलूर मठ गये. यहाँ उनसे मिलने वालों में जन साधारण जनता से लेकर राजा और राजनैतिक नेता भी शामिल होते थे.

सन 1901 में उन्होंने कुछ तीर्थ यात्राएँ की, जिनमे उनका बोध गया और वाराणसी जाना, शामिल था. गिरते स्वास्थ्य के कारण वे अस्थमा, डायबटीज और नींद न आने जैसी बिमारियों से ग्रसित हो गये.

स्वामी विवेकानंदजी की मृत्यु [Death of Swami Vivekanand]

जुलाई 4 सन 1902, अपनी मृत्यु के दिन वे प्रातः जल्दी ही उठ गये थे. वे बेलूर मठ गये और वहाँ 3 घंटों तक ध्यान [Meditation] किया और फिर अपने शिष्यों को शुक्ल – यजुर्वेद, संस्कृत व्याकरण और योग की फिलोसोफी का ज्ञान दिया. शाम को 7 बजे वे अपने कमरे में गये और किसी को भी डिस्टर्ब करने से माना किया. रात 9.10 बजे ध्यान के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी. उनके शिष्यों के अनुसार उन्होंने ‘महा–समाधी’ ली थी. उनका अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर किया गया.

स्वामी विवेकानंद की सीखें और फिलसोफी [Teachings & Philosophy of Swami Vivekanand]

स्वामी विवेकानंद जी के विचारों में राष्ट्रीयता हमेशा सम्मिलित रही, वे हमेशा देश और देशवासियों के विकास और उत्थान के लिए कार्यरत रहें. उनका मानना था कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में एक विचार या संकल्प निश्चित करना चाहिए और सम्पूर्ण जीवन उसी संकल्प के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए, तभी आप सफलता पा सकेंगे.

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स्वामी विवेकानंद का प्रभाव [Influence of Swami Vivekanand]

Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 में स्वामी विवेकानंद एक ऐसी हस्ती थे, जिनका प्रभाव कई ऐसे लोगों पर पड़ा, जो स्वयं दूसरों को प्रभावित करने में पूर्णतः सक्षम थे. इन लोगों में मुख्य रूप से शामिल थे -: हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, सुभाष चन्द्र बोस, ओरोबिन्दो घोष, रबिन्द्रनाथ टेगौर, चक्रवर्ती राजगोपाला चारी, जवाहरलाल नेहरु, बाल गंगाधर तिलक, जमशेदजी टाटा, निकोला टेसला, एनी बेसेंट, रोमेन रोल्लेंड, नरेन्द्र मोदी और अन्ना हजारे आदि.

स्वामी विवेकानंद के साहित्यिक कार्य [Swami Vivekananda Literary Works]

बानहट्टी के अनुसार ( Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 ) स्वामी विवेकानंद एक अच्छे चित्रकार, लेखक और गायक थे, अर्थात वे अपने आप में एक सम्पूर्ण कलाकार थे. उनके द्वारा लिखे गये निबंध रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन दोनों ही मैगज़ीन में छपें. उनकी भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ थी, जिसके कारण उनके द्वारा दिए गये लेक्चर्स और भी अधिक प्रभावी और समझने में आसान होते थे.

उनके कुछ रचनाए, जो उनके जीवनकाल में ही प्रकाशित [Published in his Life] हुई, उनका विवरण निम्नानुसार हैं –

क्रमांक प्रकाशन का वर्ष रचना का नाम

  • 1887 संगीत कल्पतरु [वैष्णव चरण बसक के साथ]
  • 1896 कर्म योग
  • 1896 राज योग [न्यू यॉर्क में दिए गये भाषणों के दौरान कही गयी बातों का संकलन]
  • 1896 वेदांत फिलोसोफी
  • 1897 लेक्चर्स फ्रॉम कोलोंबो टू अल्मोड़ा
  • मार्च, 1899 बंगाली रचना – बर्तमान भारत [उद्बोधन में प्रकाशित]
  • 1901 माय मास्टर [न्यू यॉर्क की बेकर एंड टेलर कम्पनी द्वारा प्रकाशित]
  • 1902 वेदांत फिलोसोफी : जनाना योग पर लेक्चर्स
    स्वामी विवेकानंद की मृत्यु के बाद प्रकाशित रचनायें [Books published by Swami Vivekananda] -:
    क्रमांक प्रकाशन का वर्ष रचना का नाम
  • 1902 भक्ति योग पर भाषण
  • 1909 द ईस्ट एंड द वेस्ट
  • 1909 इंस्पायर्ड टॉक्स [Inspired Talks]
  • – नारद भक्ति सूत्र [अनुवादित रचना]
  • – परा भक्ति [Supreme Devotion]
  • – प्रैक्टिकल वेदांत
  • – स्वामी विवेकानंद के भाषण और लेखन कार्य
  • – कम्पलीट वर्क्स – स्वामी विवेकानंद के सभी भाषण, रचनायें और प्रवचन [9 वॉल्यूम में उपलब्ध हैं]
    स्वामी विवेकानंद की जयंती में कब मनाई जाती है ? [Swami Vivekanand Jayanti 2021 Date] -:
    हर साल स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिन अर्थात 12 जनवरी को ही उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है. इसका मतलब इस साल 12 जनवरी 2021 दिन शनिवार को स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई जाएगी.

स्वामी विवेकानंद का योगदान [Contribution of Swami Vivekanand]

अपने जीवनकाल में स्वामीजी ने जो भी कार्य किये और इसके द्वारा जो योगदान दिया गया, उसके क्षेत्र को हम निम्न 3 भागों में बाँट सकते हैं-

  • वैश्विक संस्कृति के प्रति योगदान [Contribution to World Culture],
  • भारत के प्रति योगदान [Contribution to India],
  • हिंदुत्व के प्रति योगदान [Contribution to Hinduism].
  • इन क्षेत्रों में किये गये योगदान को निम्न संक्षिप्त विवरण द्वारा समझा जा सकता हैं

वैश्विक संस्कृति के प्रति योगदान [Contribution to World Culture]

  • स्वामी विवेकानंद ने धर्म के प्रति नई और विस्तृत समझ विकसित की,
  • उन्होंने सीख और आचरण के नये सिद्धांत स्थापित किये,
  • उन्होंने सभी लोगों के मन में प्रत्येक इन्सान के प्रति नया और विस्तृत नज़रिया रखने की प्रेरणा दी,
  • उन्होंने पूर्व और पश्चिम के देशों के बीच जुड़ाव [Bridge] का कार्य किया.

भारत के प्रति योगदान [Contribution to India]

  • उन्होंने भारत के साहित्य को अपनी रचनाओं द्वारा समृद्ध बनाया,
  • उनके प्रयासों से सांस्कृतिक जुड़ाव उत्पन्न हुआ,
  • उन्होंने हमारी प्राचीन धार्मिक रचनाओं का सही अर्थ समझाया,
  • भारतीय संस्कृति का महत्व समझाया और पश्चिमी सभ्यता के दुष्प्रभावों को भी वर्णित किया,
  • देश में जातिवाद को ख़त्म करने के लिए उन्होंने निचली जातियों के कार्यों का महत्व समझाया और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा.

हिंदुत्व के प्रति योगदान [Contribution to Hinduism]

  • सम्पूर्ण विश्व के सामने हिंदुत्व की महानता और इसके सिद्धांत प्रतिपादित करके इसकी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई.
  • हिन्दुओं की विभिन्न जातियों के बीच होने वाले भेदभाव और मनमुटाव को कम करने का उल्लेखनीय प्रयास किया और इसमें बहुत हद तक सफल भी रहें.
  • क्रिस्चियन मिशनरी द्वारा हिंदुत्व के संबंध में फैलाई जा रही गलत धारणाओं को समाप्त किया और इसका सही अर्थ समझाया.
  • प्राचीन धार्मिक परंपराओं और नवीन सोच का उचित समन्वय स्थापित किया.
  • हिन्दू फिलोसोफी और हिन्दू धार्मिक सिद्धांतों को एक नवीन और स्पष्ट रूप दिया.

विवेकानंद मेमोरियल [Vivekanand Memorial]

अपने जीवनकाल के दौरान 24 दिसंबर 1892 को स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी पहुंचे थे और समुद्र पर एक एकांत पहाड़ी पर जाकर ध्यान किया था, जो 3 दिनों तक चला था. यह पहाड़ी आज ‘विवेकानंद मेमोरियल’ के रूप में जानी जाती हैं और बहुत प्रसिद्ध दार्शनिक स्थल [Tourist Destination] बन चुकी हैं.

इस प्रकार स्वामी विवेकानंदजी ने अपना सम्पूर्ण जीवन परोपकार में ही व्यतीत किया और हमारे विकास के लिए नवीन भारत का भी निर्माण किया.

स्वामी विवेकानंद अनमोल वचन (Swami Vivekanand Quotes)

Swami Vivekanand Quotes In Hindi

1 You cannot believe in God until you believe in yourself. जब तक तुम अपने आप में विश्वास नहीं करोगे, तब तक भगवान में विश्वास नहीं कर सकते.
2 We are what our thoughts have made us; so take care about what you think. Words are secondary. Thoughts live; they travel far. हम जो भी हैं हमारी सोच हमें बनाती हैं इसलिए सावधानी से सोचे, शब्द द्वितीय हैं पर सोच रहती हैं और दूर तक यात्रा करती हैं.
3 Arise! Awake! and stop not until the goal is reached. उठो जागों और तब तक मत रुको जब तक अपना लक्ष्य प्राप्त ना कर सको.
4 The more we come out and do good to others, the more our hearts will be purified, and God will be in them. हम जितना बाहर आते हैं और जितना दूसरों का भला करते हैं, हमारा दिल उतना ही शुध्द होता हैं और उसमे उतना ही भगवान का निवास होगा.
5 When an idea exclusively occupies the mind, it is transformed into an actual physical or mental state. जब एक सोच दिमाग में आती हैं तो वह मानसिक और शारीरिक स्थिति में तब्दील हो जाती हैं.

Conclusion Swami Vivekananda Biography Hindi 2023

आज के इस आर्टिकल Swami Vivekananda Biography Hindi 2023 में आपको स्वामी विवेकानंद जि के जीवन के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी और उम्मीद है कि आपने स्वामी जि के जीवन से काफी सीख भी ली होगी.

Q: स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम क्या है?

Ans: स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त है।

Q: स्वामी विवेकानंद जी के पिता का क्या नाम है?

Ans: स्वामी विवेकानंद जी के पिता का नाम विश्व नाथ दत्त है।

Q: स्वामी विवेकानंद जी की माता का क्या नाम है?

Ans: स्वामी विवेकानंद जी की माता का नाम भुवनेश्वरी देवी है।

Q: स्वामी विवेकानंद जी का जन्म कब हुआ था?

Ans: स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था।

Q: स्वामी विवेकानंद जी की मृत्यु कब हुई थी?

Ans: स्वामी विवेकानंद जी की मृत्यु 04 जुलाई 1902 को हुई थी।

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